धरले रे कुदारी गा किसान … Dharle Re Kudari Ga Kisan

आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे

आ~आ~आ~आ~
आ~आ~आ~आ~
हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
आ~आ~आ~आ~
आ~आ~आ~आ~

धरले रे कुदारी गा किसा~न
धरले रे कुदारी गा किसा~न
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
(धरले रे कुदारी गा किसा~न
धरले रे कुदारी गा किसा~न
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे)

हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
आ~आ~अ आ~आ~अ
आ~आ~अ आ~आ~अ
हो~अ हो~अ हो~अ हो~अ
हो~अ हो~अ हो~अ हो~अ

ऊँच नीच के भेद ला, मिटाएच ला पड़ही
(ऊँच नीच के भेद ला, मिटाएच ला पड़ही)
चलो चली बड़े बड़े, ओदराबोन खरही
(चलो चली बड़े बड़े, ओदराबोन खरही)
जुर मिल गरीबहा मन, संगे मा होके मगन
(जुर मिल गरीबहा मन, संगे मा होके मगन)
करपा के भारा भारा बांट लेबो रे~ए~ए~ए
(आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
धरले रे कुदारी गा किसा~न
धरले रे कुदारी गा किसा~न
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे)

आ~आ~आ~आ~
आ~आ~आ~आ~
हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
आ~आ~आ~आ~
आ~आ~आ~आ~

चल गा पंडित, चल गा साहु, चल गा दिल्लीवार
(चल गा पंडित, चल गा साहु, चल गा दिल्लीवार)
चल गा दाऊ, चलौ ठाकुर, चलना गा कुम्हार
(चल गा दाऊ, चलौ ठाकुर, चलना गा कुम्हार)
हरिजन मन घलो चलौ, दाई दीदी मन निकलौ
(हरिजन मन घलो चलौ, दाई दीदी मन निकलौ)
भेदभाव गड़िया के पाट देबो रे~ए~ए~ए
(आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
धरले रे कुदारी गा किसा~न
धरले रे कुदारी गा किसा~न
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे)

हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
हो~ओ~ओ~ओ~ हो हो
आ~आ~आ~आ~
आ~आ~आ~आ~
हो~अ हो~अ हो~अ हो~अ
हो~अ हो~अ हो~अ हो~अ

जांगर पेरईया हम, हवन गा किसान
(जांगर पेरईया हम, हवन गा किसान)
भोम्भरा अउ भादो के, हवन गा मितान
(भोम्भरा अउ भादो के, हवन गा मितान)
ऐ पईत पथरा बन, हितवा ला अपन हमन
(ऐ पईत पथरा बन, हितवा ला अपन हमन)
गाँव के सियानी बर, छाँट लेबोन रे~ए~ए~ए
(आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
धरले रे कुदारी गा किसा~न
धरले रे कुदारी गा किसा~न
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
धरले रे कुदारी गा किसा~न
धरले रे कुदारी गा किसा~न
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे
आज डिपरा ला खन के, डबरा पाट देबो रे)


गायन शैली : ?
गीतकार : मुकुंद कौशल
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : केदार यादव अउ साथी
संस्‍था/लोककला मंच : सोनहा बिहान

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

 

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

30 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. ASHOK BAJAJ
    अक्टूबर 30, 2010 @ 07:37:42

    हिम्मत अऊ हौसला बढ़ाय बर बधाई .

    प्रतिक्रिया

  2. ASHOK BAJAJ
    अक्टूबर 30, 2010 @ 07:38:17

    बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

    प्रतिक्रिया

  3. ishwar khandeliya
    नवम्बर 02, 2010 @ 20:52:16

    बहुतेच बढ़िया लागिस इ गीत ला सुनके बधाई तुम्हर प्रयास बर

    प्रतिक्रिया

  4. basant siware
    मार्च 14, 2011 @ 14:06:11

    thanks barso bad ye gana la sunke dil bhar gaya ji asha hai ek aur gana kedar yadav ka chhutge dai dada ke angna bhi is blog me dalne ki kripa karenge

    प्रतिक्रिया

  5. uttarakumarlahare
    अप्रैल 24, 2011 @ 19:06:37

    site banane wale bhai, yeh har tor bahut sughar prayas haway akar se, chhattisgarh ke mati ke khusbu har, jammo dahar failhi….

    प्रतिक्रिया

  6. yogesh nagpure
    मई 05, 2011 @ 12:34:18

    jindagi ke aane vale pal in geeto se khushnasib honge.

    प्रतिक्रिया

  7. saajan
    अगस्त 19, 2011 @ 14:08:35

    behtarin gana hare mor favorite

    प्रतिक्रिया

  8. saajan
    अगस्त 19, 2011 @ 14:19:32

    mor pasand ke geet bar bahut bahut dhanyawad

    प्रतिक्रिया

  9. sudhir sharma
    सितम्बर 01, 2011 @ 18:41:42

    Sabo collections bane hawah badhai
    sudhir sharma
    9425358748

    प्रतिक्रिया

  10. nitin dixena
    सितम्बर 20, 2011 @ 17:43:12

    rajesh ji namashkar
    mai aapka bhut bhut abhari hu ki aapne mujhe yeh geet diya or download karne ka tarika bhi bataya n mai iska abhar kaise waykt karu mai nai samjh pa ra hu bhut but dhanywad sir i hope aap or bhi purane geeton ka sangrah hame pradan karenge thank you very much

    प्रतिक्रिया

  11. mukesh
    नवम्बर 30, 2011 @ 15:35:53

    bhai sahab mola ek geet sune ke bhari ichchha he bol likhat hawo mor jatan karo re mai mati mahatari awo
    sukh dukh ke sang chalieya sangwari o

    प्रतिक्रिया

  12. n kl tiwari
    अप्रैल 03, 2012 @ 21:37:27

    aisa lag raha hai ki aaj ke sandarbha mai hi geet gaya gaya hai. dusare sabdon men kalatit geet.

    n k tiwari

    प्रतिक्रिया

  13. govardhan sahu kosrangi (raipur)
    जनवरी 18, 2013 @ 07:36:12

    kedar yadav ji ko sat sat naman kedar ji ka aur git jorane ka kripa karege

    प्रतिक्रिया

  14. Rajendra Kumar Sahu
    मार्च 09, 2013 @ 13:30:45

    Bachpan me ye git suna Tha. Bahut-2 badhai aapke collection au prayas br

    प्रतिक्रिया

  15. DEEPAK KUMAR
    अप्रैल 26, 2013 @ 05:22:49

    Bahut achchha lagis..

    प्रतिक्रिया

  16. Yashwant sahu
    दिसम्बर 20, 2013 @ 10:05:46

    Abbad sugghar lagise sangi.

    प्रतिक्रिया

  17. DIKPAL SINGH
    जनवरी 25, 2014 @ 20:02:28

    I like. this song

    प्रतिक्रिया

  18. shani bhaskar
    जनवरी 28, 2015 @ 00:06:55

    dil me sametati chhattisgharh k lok geet…

    प्रतिक्रिया

  19. deepak sahu
    मार्च 17, 2015 @ 16:55:13

    maza aage

    प्रतिक्रिया

  20. HITESH PORTE
    मई 04, 2015 @ 17:29:45

    sabo hamar chhattisgarg ke jammo varg ke siyan janhuriya man la mor taraf le gada gada jay johar gana sun ke bahut accha lagis mor man har gadgad ho gis main har asha rakhio ki hamr chaattisgarhi sanskriti our fare phuleee

    प्रतिक्रिया

  21. Colonel Sadan
    मई 06, 2015 @ 11:32:52

    purane gaane sun kr bachpan yad aa gya. Thanks

    प्रतिक्रिया

  22. dilesh sahu Ranigaon
    जून 02, 2015 @ 08:48:19

    Bahut badiya

    प्रतिक्रिया

  23. peetamber sahu
    जून 13, 2015 @ 19:38:41

    Bahut aacha lagis tor gana ga i like you

    प्रतिक्रिया

  24. devrndra kumar dewangan
    जुलाई 22, 2015 @ 18:41:15

    bahut badhiya gana have

    प्रतिक्रिया

  25. PRADEEP TIKARIHA
    जुलाई 26, 2015 @ 21:56:01

    gana sunke man khus hoge bahut din le mai har khojat rehew isne type ke chattisgarhi gana ke site.bahut bahut badhi

    प्रतिक्रिया

  26. PRADEEP TIKARIHA
    अगस्त 01, 2015 @ 22:13:23

    mangrohan sambandhit aalekha satybhama chachi ka padhakar bahut achacha laga aur mujhe pahli bar iske bare me pata laga.thanks.

    प्रतिक्रिया

  27. bhagwat das mahant
    अगस्त 17, 2015 @ 13:08:00

    bhari khushi laghis apan chattishgarh ke website dekh ke.. aap man ke koti koti dhanyawad

    प्रतिक्रिया

  28. yuvraj
    सितम्बर 16, 2015 @ 22:15:11

    bahut shughar geet , aison geet sunke kisaan man ke dil ha bad gadgad ho jathe…

    प्रतिक्रिया

  29. mohan sa
    सितम्बर 22, 2015 @ 08:33:18

    Fulwari saje he o durga dai

    प्रतिक्रिया

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