भरथरी (प्रसंग 6. शंकर पूजा, चम्पा को शंकर दर्शन) … Bharthari

आज प्रस्तुत है, ‘टी सीरीज’ म्यूजिक कंपनी द्वारा सन् 1993 में रिलीज रेखादेवी जलक्षत्री द्वारा प्रस्तुत भरथरी गायन श्रृंखला का छटवां व अंतिम प्रसंग…

भरथरी - रेखादेवी जलक्षत्री

1. राजा का जोगी वेष में आना
2. चम्पा दासी का जोगी को भिक्षा देना
3. चम्पा दासी द्वारा राजा को पहचानना
4. रानी का चम्पा दासी को सजा देना
5. रानी से चम्पा दासी के लिए विनती
6. शंकर पूजा, चम्पा को शंकर दर्शन

आप रेखादेवी जलक्षत्री से मोबाईल नं. 9977533869 पर संपर्क कर सकते हैं,
पता – आजाद चौक, ग्राम व पोस्‍ट-मांढर, जिला-रायपुर, छत्‍तीसगढ़ 493111

भरथरी गायिका रेखादेवी जलक्षत्री की महाकालेश्वर भरथरी पार्टी के अन्य कलाकार हैं
रागी : रामविशाल साहु
हारमोनियम : नरेन्द्र नेताम
मंजीरा : परमेश्वर यादव
तबला : भागवत रात्रे
नाल : संतोष पादरी
बांसुरी :रमेश यादव
बैंजो : मोहन धीवर
घुंघरू : एशू खरे

भरथरी - रेखादेवी जलक्षत्री

भरथरी - रेखादेवी जलक्षत्री व रागी

 

आइए सुने भरथरी लोकगाथा का प्रसंग “शंकर पूजा, चम्पा को शंकर दर्शन”

— गीत —
हाथ म फुल धरके चढ़ावंव दीदी वो
हाथ म फुल धरके चढ़ावंव दीदी य
भोलेबाबा ल वो, शंकरजी ल ना
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
हाथ म फुल धरके चढ़ावंव दीदी य
भोलेबाबा ल वो, शंकरजी ल ना
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो

बेल पान दुबी, दुधी रखेंव पूजा के थारी म
बेल पान नरियर दुबी रखेंव खलोक थारी म
बेल पान दुबी, दुधी रखेंव पूजा के थारी म
रखेंव पूजा के थारी म, रखेंव पूजा के थारी म
बिगड़ी बना दे मोरे, आयेंव तोर दवारी म
आयेंव तोर दवारी म, आयेंव तोर दवारी म
हाथ जोड़के माथ मैं नवावंव दीदी वो
शंकरबाबा ल वो, भोलेबाबा ल वो
शंकरबाबा ल वो, दीदी भोलेबाबा ल वो
हाथ म फुल धरके चढ़ावंव दीदी य
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो

माथ म चंदन तोरे, गले में नाग लपटे हे
गला में नाग लपटे हे, गला में नाग लपटे हे
मिरगा के छाला पहिने, जटा में गंगा लटके हे
जटा में गंगा लटके हे, जटा में गंगा लटके हे
सावन सोमवारी के गोहरावंव दीदी वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
हाथ म फुल धरके चढ़ावंव दीदी य
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो

एक हाथ म जामुन धरे, दूसर म तिरछुल
दूसर म तिरछुल, बाबा दूसर म तिरछुल
अंगभरे राख चुपरे, गांजा ल पीये फुकफुक
गांजा ल पीये फुकफुक, गांजा ल पीये फुकफुक
इ गोधरे गांजा ल पीके गुस्साए हाबय वो
शंकरजी ल वो, दीदी भोलेबाबा ल वो
शंकरबाबा ल वो, दीदी भोलेबाबा ल वो
हाथ म फुल धरके चढ़ावंव दीदी य
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो
भोलेबाबा ल वो, दीदी शंकरजी ल वो

— गाथा —
अब ये चम्पा दासी राहय ते रागी (हौव)
भगवान भोलेनाथ के पूजा करथे (हा)
भोलेनाथ राहय ते प्रसन्न हो जथे (हौव)
अउ किथे (हा)
बेटी (हा)
बेटी ते सो माँग, मे सो देबर तैयार हंव (हौव)
तब किथे बाबा (हा)
मोर ऊपर विपत आगे हे (हौव)
में का बताव बाबा (हा)
मोर बात ल रानी सामदेवी समझत नई ये (हा)
अउ बस मोला मार के (हौव)
चारझन दीवान ला आदेश देवा देहे (हा)
अउ फांसी देके ऑर्डर दे देहे (हौव)
अब मे फांसी में चढ़हूं बाबा (हौव)
तब भोलेनाथ किथे (हा)
जा बेटी (हौव)
तोला चिंता करे के बात नईये (बात नईये)
चम्पा दासी राहय तेन (हौव)
जाथे सुग्घर घर में (हा)
पीताम्बरी के साड़ी पहिन लेथे रागी (हौव)
पहिने के बाद (हा)
चारझन कहार रिथे डोला बोहईया (हौव)
जब डोला में बईठथे (हा)
तब, सब सखी सहेली रिथे (हौव)
मिलथे भेंटथे (हा)
अउ रोथे, अउ किथे बहिनी हो (हा)
जईसे में ससुराल जातहव (हौव)
वइसे मोला समझव, में जिंदगी भरके लिए फांसी में चघत हौव (हा)
अब ये चारझन कहार राहय तेन रागी (हौव)
ले जाथे (हा)
तब चम्पा दासी काय किथे जानत हस (हौव)

— गीत —
बोले बचन चम्पा दासी हा, चम्पा दासी हा या
सुनले कहार मोर बाते ल
बोले बचन चम्पा दासी हा, चम्पा दासी हा वो
सुनलव कहार मोर बाते ल

सौ शर्त जगा, तोला देवथव दान
सवर पति के गा, तोला देवथव दान
येदे तरी में डोला धिर-लमाबे गा, धिर-लमाबे गा, भाई येदे जी
येदे तरी में डोला धिमाबे गा, धिमाबे गा, भाई येदे जी

धिरे-च-धिर ये जावत थे, मोर जावय दीदी
डोला ल लेगथे राते के
धिरे-च-धिर ये जावत थे, मोर जावय दीदी
डोला ल लेगथे राते के

तरिया के पारे में वो, डोला रखे हावय
तरिया के पारे में वो, डोला रखे हावय
येदे चम्पा ह डोला ले उतरत थे, येदे उतरत थे, भाई येदे जी
येदे चम्पा ह डोला ले उतरत थे, येदे उतरत थे, भाई येदे जी


गायन शैली : भरथरी
गीतकार : ?
रचना के वर्ष : 1993
संगीतकार : रामकुमार साहू
गायन : रेखा जलक्षत्री
रागी : रामविशाल साहु
एल्बम : भरथरी
संस्‍था/लोककला मंच : महाकालेश्वर भरथरी पार्टी
म्यूजिक कंपनी : टी सीरीज

रेखादेवी जलक्षत्री द्वारा प्रस्तुत भरथरी गायन के अन्य अंश मिलने तक आप भरथरी के इन्ही प्रसंगों से आनन्द उठाइए…

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

 

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

7 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. Makkhan Sahu
    जनवरी 18, 2011 @ 19:46:45

    bahut badriya lagish

    प्रतिक्रिया

  2. lochan prasad dansena
    अप्रैल 13, 2012 @ 08:19:20

    best song

    प्रतिक्रिया

  3. Jhanendra Dhruv
    मार्च 21, 2013 @ 11:26:12

    Mola bahut badiya lagis pahli mai nai janat rehev ki hamar cg gana bhi net me he ekar seti mai shabhi jhan la dhanyvad dethon.

    प्रतिक्रिया

  4. HILENDRA THAKUR
    अप्रैल 02, 2013 @ 15:43:55

    cg geet sangi ka sanklan sarahniy pahal hai

    प्रतिक्रिया

  5. Poonmaram guriya
    जुलाई 18, 2013 @ 17:17:36

    शँकर सुवन

    प्रतिक्रिया

  6. arjun dhruw
    जनवरी 15, 2016 @ 23:29:59

    Bahut badhiya sugghar lagise dhanyawad

    प्रतिक्रिया

  7. पिन्टू साहू
    मार्च 02, 2016 @ 07:20:42

    छत्तीसगढ़ीया सबले बढ़िया जय जोहार

    प्रतिक्रिया

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