गजब दिन भईगे राजा … Gajab Din Bhaige Raja

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण मड़ई मेलों का अपना अलग ही रोमांच होता हैं। जहाँ होते है सजे धजे लोग, उल्लास उमंग से भरे हंसते खिलखिलाते किलकारियों से गूंजता माहौल, सजी-धजी दुकानें, गुब्बारे, खेल-खिलौने व फिरकनियां, जलेबी, मिठाई, बताशा और उखरा… छत्तीसगढ़ का मेला कार्तिक पूर्णिमा महादेव घाट (रायपुर) से प्राम्भ होकर फागुन मड़ई दंतेवाड़ा तक अनवरत चलता रहता है…

महासमुंद जिले के बागबहरा विकासखण्ड के गांव खल्लारी में चैत पूर्णिमा पर मेला लगता है, जहाँ खल्वाटिका नाम से चर्चित ऊंची पहाड़ी पर खल्लारी माता का मंदिर है। पहाड़ों पर बसे इस मंदिर के पास में ही भीम के पैरों के निशानों के साथ उनका चूल्हा भी है जहां पर वे खाना बनाते थे। यहां आने के बाद भीम पांव और चूल्हे के साथ प्रकृति के कई अद्भूत नजारे देखने को मिलते हैं।

खल्लारी माता

खल्लारी माता

भीमपांव

भीमपांव

तो आइए खल्लारी मेले के आकर्षण पर बंधा शेख हुसैन का गाया ददरिया सुनते हैं।

चक्कर मा घोड़ा, नई छोड़व मैं जोड़ा
झुलाहूँ तोला वो, हाय झुलाहूँ तोला वो
नदिया मा डोंगा, नई छोड़व मैं जोड़ा
तौराहूँ तोला वो, हाय तौराहूँ तोला वो
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~

चक्कर मा घोड़ा, नई छोड़व मैं जोड़ा
झुलाहूँ तोला वो, हाय झुलाहूँ तोला वो
नदिया मा डोंगा, नई छोड़व मैं जोड़ा
तौराहूँ तोला वो, हाय तौराहूँ तोला वो
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~

संगी जउहरिय नई छोड़ही तोर संग गोरी वो~
गोरी वो, गोरी वो, गोरी वो
संगी जउहरिय नई छोड़ही तोर संग, में बन जाहूं चकरी, तैं उड़बे पतंग
चटभइंया बोली तोर निक लागे वो, तोर बोली-ठोली हा गुरतुर लागे वो
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~

तरिया के पानी लागे है बनी गोरी वो~
गोरी वो, गोरी वो, गोरी वो
तरिया के पानी लागे है बानी, दुरिहा घुजके भरबे, कर छेड़कानी
बेलबेल्हा टुरा घटौन्दा के तीर, बइठे बजावत रइथे सिटी
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~
गजब दिन भईगे राजा तोर संग मा, नई देखेंव खल्लारी मेला वो~


गायन शैली : ददरिया
गीतकार : संत मसीह दास
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : शेख हुसैन
एल्बम : ?
संस्‍था/लोककला मंच : संगम आर्केस्ट्रा

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

 

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

18 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. राहुल सिंह
    जनवरी 22, 2011 @ 07:57:59

    बढि़या गीत लाया आपने. हमारे शोध दल ने याद किया रवि नगर वाले श्री प्रभुलाल व्‍यास उर्फ बबला भैया माइको, रायपुर डीजल्‍स, लीलैण्‍ड एजेंसी वाले को, क्‍योंकि यह गीत संभवतः श्री संत मसीह दास जी की रचना है, जो इसी संस्‍था में थे और लीलैण्‍ड ट्रक की क्षमता और परिवहन सुविधा पर भी उन्‍होंने एक बढि़या गीत रचा था.

    प्रतिक्रिया

  2. Harihar Vaishnav
    जनवरी 22, 2011 @ 09:18:58

    Geet la sun ke bahute aanand aa ge. Geet sunaaye bar aap la gaadaa-gaadaa dhanyawaad. Aap bahute mahatwapuurna kaam karat ho hamar Chhattisgarh ke geet-sangeet la net ke jariye logan tak amaraaye ke ye udim ha aitihaasik kaam aay. Bastar ke geet-sangeet la ghalok aisane logan tak amaraaye ke udim kartew ta au bane lagtis.

    प्रतिक्रिया

  3. Rajendra soni
    जनवरी 23, 2011 @ 06:11:02

    Bahut hi barhiya, mai jaun jagah khojat rahe, wo jagah yehi her aay. Bhaiya mola laxman masturiha ke mor sang chalo re gana chahiye 26 jan ke din gaye k he. Kripa krke email kr deva. YouTube se download nai hot he.

    प्रतिक्रिया

  4. Dr. Dhirendra Sao
    मार्च 01, 2011 @ 23:45:09

    SUPRISED…INDEED NOT LOCATING FAMOUS LANDMARK IN CHHATISHIGARHI CULTURE………….CHANDENI-GONDA………..THE PRIDE OF US …..THE LOCALITES///?????????///

    प्रतिक्रिया

    • cgsongs
      मार्च 02, 2011 @ 07:24:22

      छत्तीसगढ़ी गीत संगी – छत्तीसगढ़ की लोकगीतों और गाथाओं को संरक्षित करने का एक प्रयास है, जो प्रारंभिक दौर में है| निसंदेह चंदैनी गोंदा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का गौरव है, किन्तु छत्तीसगढ़ी संस्कृति को प्रस्तुत करने वाले और भी बहुत से मील के पत्थर हैं|

      सभी मील के पत्थरों को एक-एक करके इस ब्लॉग में प्रस्तुत किया जा रहा है| समयानुसार यह ब्लॉग भी चंदैनी गोंदा के सुगंध से महक उठेगा…

      प्रतिक्रिया

    • kamalsharma
      अप्रैल 29, 2011 @ 23:04:18

      dhirendra bhai aap mujhe bhoole nahi honge , mumbai me hun vividh bharati sewa mein . pehle aakashwani raipur mein tha .

      प्रतिक्रिया

  5. vaibhav shiv
    मार्च 28, 2011 @ 12:32:21

    adbad sughghar ,,,, mela – madai ke geet sun bad nik lagis …..jai ho khallari mata ki

    प्रतिक्रिया

  6. kamalsharma
    अप्रैल 29, 2011 @ 23:07:30

    adbhut prayaas hai , mumbai mein rehakar bhi jaise apne anchal mein hun , kai purani yaaden taaza ho gayin, mera hardik sadhuvad evam anginat shubhkaamnayen.

    प्रतिक्रिया

  7. shatruhansingh dhruw
    मई 20, 2011 @ 11:49:24

    better good …better best

    thanks

    प्रतिक्रिया

  8. Prasanna Sharma
    मई 27, 2011 @ 13:52:43

    bhi aapko koti koti dhanyawad hai, chhatisgah ki mati ki sachhi mahak in geeto me hi hai … aasha hai ki aaj kal ke so called chhatisgarhi remix orriya+chhatisgarhi kalakaro ko aapke prayas se shayad kuchh sahi disha mile…………… saadhuwaad..

    प्रतिक्रिया

  9. naveen kumar tiwari
    जुलाई 15, 2011 @ 22:14:59

    apne chattisgarhi geeto ka acha callection sanjo kar rakha hai jiske liye app sabhi jo is site ko majboot banaye saduwad ke patr hai. khallari mele ka ye geet bahoot dino ke bad mujhe sunane mila mujhe bahoot khoshi haui .panh dhanyawad ke sath mehanati team ko sadhuwad, jai jaohar jai chattisgarh.

    प्रतिक्रिया

  10. SHAMMI
    जुलाई 24, 2011 @ 08:16:05

    BAHUT PASAND AAYA
    I LOVE THIS WEB SITE AND THE SONG IS VERY BEUTIFUL.

    प्रतिक्रिया

  11. mohit chandrakar
    जुलाई 24, 2011 @ 13:49:08

    mohit

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  12. mukesh chaturvedi
    जनवरी 25, 2012 @ 12:33:16

    mujhe dukhiya bai markam ke dwara gaya huwa geet chahiye geet ke bol h-
    “mor jatan karo re mai mati mahatari o ”
    “sukh dukh ke sang chalaiya sangawari o”
    “mai mati mahatari o”

    प्रतिक्रिया

  13. janak
    दिसम्बर 25, 2012 @ 13:51:12

    VERY GOOD WEB
    i lick this

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  14. Ramkhilawan sahu
    जनवरी 07, 2014 @ 12:53:10

    bahut bahut dhanyawad bhaiya Jen git man l mai h
    bahut din se khojat rehe ho o mola mil ge bahut hi madhur madhur git man l piroy kee prayas kare ho wastaw me sarahni hawe au hamar ye chhttisgarhi git man l jiwit rakhe keep ek achha pray as ha we.

    me ha khilawan sahu khorpa abhanpur raipur c.g. se

    प्रतिक्रिया

  15. Vinod
    अगस्त 12, 2016 @ 20:51:39

    Very good

    प्रतिक्रिया

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