मोर झूलतरी गेंदा … Mor Jhultari Genda

बाग बगीचा दिखे ल हरियर
~
बाग बगीचा दिखे ल हरियर
दुरूग वाला नई दिखे बदे हव नरियर
मोर झूल तरी
मोर झूल तरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फूलगे
सेमर फूलगे अगास मन चिटुको घड़ी नरवा मा
नरवा मा अगोर लेइबे~ ना

चांदी के मुँदरी किनारी कर ले
~
चांदी के मुँदरी किनारी कर ले
मैं ह रइथव दुरूग में चिनहारी कर ले
मोर झूल तरी
मोर झूल तरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फूलगे
सेमर फूलगे अगास मन चिटुको घड़ी नरवा मा
नरवा मा अगोर लेइबे~ वो

पीपर पाना डोलत नइये
~
पीपर पाना डोलत नइये
का होगे टुरी ल बोलत नइये
मोर झूल तरी
मोर झूल तरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फूलगे
सेमर फूलगे अगास मन चिटुको घड़ी नरवा मा
नरवा मा अगोर लेइबे~ वो

नवा सड़कीया रेंगे ल मैना
~
नवा सड़कीया रेंगे ल मैना
चार दिन के अवईया लगाये महीना
मोर झूल तरी
मोर झूल तरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फूलगे
सेमर फूलगे अगास मन चिटुको घड़ी नरवा मा
नरवा मा अगोर लेइबे~ गा

पांच के लगइया पचीस लग जाए
~
पांच के लगइया पचीस लग जाए
बिना लेगे नई छोड़व पुलिस लग जाए वो
मोर झूल तरी
मोर झूल तरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फूलगे
सेमर फूलगे अगास मन चिटुको घड़ी नरवा मा
नरवा मा अगोर लेइबे~ वो

गाय चराये हियाव करिले
~
गाय चराये हियाव करिले
दोस्ती मा मजा नईये बिहाव करले
मोर झूल तरी
मोर झूल तरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फूलगे
सेमर फूलगे अगास मन चिटुको घड़ी नरवा मा
नरवा मा अगोर लेइबे~ गा


गायन शैली : ददरिया
गीतकार : ?
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : केदार यादव
गायन : केदार यादव, साधना यादव
एल्बम : ?
संस्‍था/लोककला मंच : नवा बिहान

 


केदार यादव – साधना यादव

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

 

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

21 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. राहुल सिंह
    फरवरी 18, 2011 @ 08:05:43

    ”मोर झूल तरी गेंदा इंजन गाड़ी सेमर फूलगे
    सेमर फूलगे अगास मन चिटुको घड़ी नरवा मा
    नरवा मा अगोर लेइबे~ ना”
    सुने म अच्‍छा तो लगथे, लेकिन ए लाइन के ठीक ठीक मतलब मो ल समझ म नइ आवय.
    फोटो बहुत बढि़या आत हे पोस्‍ट संग.

    प्रतिक्रिया

    • cgsongs
      फरवरी 18, 2011 @ 09:08:23

      छत्तीसगढ़ी गीतों का असली मजा उसके मूल रूप में ही होता है और हिन्दी में अनुवाद करने पर कभी कभी पूरा अर्थ चला जाता है। इस कारण से हम गीतों के साथ हिन्दी अनुवाद नहीं देते हैं। साथ ही इसका दूसरा कारण ये भी है कि इससे लोगों में छत्तीसगढ़ी भाषा को जानने, समझने, सिखने और बोलने की इच्छा प्रस्फुटित हो सके।

       

      आपकी के लिए इस ददरिया का हिंदी अनुवाद…

      बाग और बगीचे हरे-भरे दिख रहे हैं। पर दुर्ग वाला नहीं दिख रहा है। मैंने उसके लिए मन्नत मांगी है, नारियल चढ़ाया है। मेरे सर पर झूल (कलँगी) है, गले में गेंदे का फुल है। हृदय रेल के इंजन की तरह धड़क रहा है। जिस तरह सेमल के ऊँचे ऊँचे पेड़ों में फुल आ गए हैं उसी तरह मेरे होठों पर सेमल फुल सी लाली है। मेरे प्रिय थोड़ी देर के लिए नाले पर मेरी प्रतीक्षा कर लेना।

      चांदी की अँगूठी में रेखाएं खींच लेना। मैं दुर्ग का रहने वाला हूँ मेरी पहचान कर लेना।

      पीपर के पत्ते झूम नहीं रहे हैं। क्या बात है तुम भी गुमसुम हो। क्यों कुछ नहीं बोल रही हो?

      नई सड़क पर मैना चल रही है। तुम पांच दिनों में आने वाले थे। पर महीना बित गया तुम नहीं आये।

      गाय चराते समय यह जरूरी है उनका हिसाब रखना कि गायें कितनी हैं।
      प्रिय! दोस्ती में मजा नहीं है। बेहतर है हम विवाह कर लें।

      प्रतिक्रिया

  2. sevak ram sahu
    मार्च 07, 2011 @ 16:43:09

    mai sochta tha ke kya kabi mujhhe internet par chhatisgarhi gane milenge ya nhi par ye website dekh kar lga ki chhattisgarhi gano ne tarki ki hai aur mai bahut aabhari ho aap sabhi logo ka jinhone ye website bnaya hai jiski wajah se mujhhe aapne prades ke gane sunne ka muka mila thank you

    प्रतिक्रिया

  3. krishan kumar sidar
    मार्च 17, 2011 @ 11:57:21

    my best wisheses to you for lounching this website for chhttisgadi viever chouice songs. and we shall very proud of this cg culturtel protective programme. and future is very brite this vebsite.

    प्रतिक्रिया

  4. JITENDRA KODOPI
    मार्च 17, 2011 @ 16:08:56

    main es website ke bare me chamachar patra ke madhiyam se jana. eske liye meri or se bhadhai .esi tarah aap age bhadte jaye hum appke sath hai.

    प्रतिक्रिया

  5. LOMASH KUMAR SAHU
    मार्च 17, 2011 @ 21:42:58

    aapka yah prayas sarahniy hai. iske liye aapka tahedil se dhanyawad hai.
    aapne chhattisgarh ke mati ki anmol dharohar ko sahejane ka kam mkiya hai jiske liy aap hamesha yad kiye jaayuenge.
    thanks

    प्रतिक्रिया

  6. cgsongs
    मार्च 18, 2011 @ 07:49:58

    सेवक राम, कृष्ण कुमार, जितेन्द्र, लोमश जी आप सबका धन्यवाद…

    प्रतिक्रिया

  7. rupesh yadav
    मार्च 18, 2011 @ 10:02:50

    mor naam rupesh hay mola aap k y sit say bahoot khusi milis aap la bahoot bahoot badhai

    प्रतिक्रिया

  8. sivprasad sajag
    अप्रैल 12, 2011 @ 14:33:50

    bahut mith lagthe aaj kal aesna git sune bar nai milay . aap man ke mehnt safal hoge. hamu man tar gen ye git ganga me.

    प्रतिक्रिया

  9. maahie nayak
    अप्रैल 15, 2011 @ 10:59:13

    hum ise pasand karte hain……………….Soooooooooo thanksss!

    प्रतिक्रिया

  10. गोकुल सोनी
    मार्च 18, 2012 @ 21:28:24

    छत्तीसगढ़ी लोकगीत सुनना मुझे बचपन से अच्छा लगता है। यूं कहूं मेरी आत्मा को शांति मिलती है। काफी दिनों से मुझे इन्टरनेट पर इसकी तलास थी। मेरे एक मित्र ने बताया कि राजेश चन्द्राकर जी इस दिशा में काफी मेहनत किये है़। राजेश जी आपका आभार और धन्यवाद जो नेट पर पुराने छत्तीसगढ़ी गीतो को संग्रहित कर मेरे जैसे अनेक लोगों को आपने उपलब्ध कराया।…………………………गोकुल सोनी, अश्वनीनगर, रायपुर 9425522044

    प्रतिक्रिया

  11. ravikant singh
    मार्च 20, 2012 @ 15:42:57

    Rajesh ji aapka bahut-bahut dhanyawad ,aapne jo karya kiya uske liye uskeliye koti-koti badhai.

    प्रतिक्रिया

  12. Ramadhar Sahu
    अक्टूबर 05, 2012 @ 07:36:10

    dadaria mere jeevan ke liye prerna srot hay

    प्रतिक्रिया

  13. kalidas
    अक्टूबर 13, 2012 @ 22:51:48

    Thank,nice song nice site.thanks again.

    प्रतिक्रिया

  14. lochan
    जनवरी 22, 2013 @ 17:43:01

    best song

    प्रतिक्रिया

  15. Pradeep Sahu
    फरवरी 18, 2013 @ 22:16:11

    Jai Johar Bhaiya Bahut badiya

    प्रतिक्रिया

  16. dr.jg chauhan
    मार्च 12, 2013 @ 18:53:14

    bahut sughghar…..

    प्रतिक्रिया

  17. SURESH SATNAMI
    मई 01, 2013 @ 14:43:12

    रस तो रथेच गवईया मन के मीठ बोली मा मनह परछ होथे गीत सुने मे फिर मैह कहथो ई गीतमन तो छत्तीसगढी भुया के निशानी हावे फिर ये ला नई सुन के कहाँ जबो चार दिन के ये बिरथा लोक मे कतक जिबो तभे तो मै कथो चित मन पर छल करे बतो सुनजी ॰॰॰जय सतनाम जयहो मोर मुया॰॰॰

    प्रतिक्रिया

  18. shashi kumar diwan
    जून 13, 2013 @ 17:42:42

    aap ne bahut achchha kam kiya hai, c.g. ke lok geeto ko aap ne net pe dala eske liye aapko bahut bahut bhadhai.

    प्रतिक्रिया

  19. पातंजलि अॻवाल
    नवम्बर 03, 2015 @ 00:58:49

    मन विभोर हो गे,

    प्रतिक्रिया

  20. rajendra pandey
    दिसम्बर 05, 2015 @ 22:52:25

    बचपन से ये गीत मेरा बहुत प्रिय गीत है cgsongs word press को बहुत बहुत धन्य वाद जो अभी भी इसे सुन पाना सम्भव किया है आपने

    प्रतिक्रिया

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