होई हव सहाय … Hoi Hav Sahay

दौतेला

तेलचघी के बाद के नेंग ए ‘दौतेला’ एला ‘देवतला’ घलो किथे। दौतेला में सुवासिन-मन दार-चाउंर धरके बैगा घर जा के नाचथे गाथे। बैगा ह तेल-हरदी पिस के देथे। जेला पहिली देवी-देवता ल तेल-हरदी चघाय जाथे। ए बेरा गाये जाने वाला गीत ल ‘मायमौरी’ के गीत कहे जाथे। गीत म देवी-देवता के संगे-संग पुरखा मन-ल बिहाव के नेवता दे जाथे अउ ओकर से बिहाव ल बिना अरचन के बने से निपट जाय के बिनती करे जाथे। बांचे तेल-हरदी ल वर-कन्या ल चघाय जाथे।

दौतेला

मायमौरी गीत कुछ उदाहरण –

देव धामी ल नेवतेंव
उन्हूं ल न्योत्यों
जे घर छोड़ेन बारेन भोरेन
ता घर पगुरेन हो
माता पिता ल नेउतेन
उन्हू ल नेउतेन

– o –

हाथे जोरि न्यौतेंव मोर देवी देवाला
हो देवी देवाला
घर के पुरखा मन होओ सहाय…
बिनती करेंव मंय माथ नवायेंव
हो माथ नवायेंव
कर लेहो एला स्वीकार…

 

मायन

दौतेला के बाद के नेंग ए ‘मायन’। मायन ल मातृकापूजन घलो किथे। चांउर के कुढ़ी के सामने दीवाल म पुतरी -पुतरा के चित्र बनाये जाथे।

माय

मायन मा सप्त मातृका के पूजा होथे। गोमातृका, तृणमातृका, मृयमातृका, तुंगमातृका, जलमातृका, तोरणमातृका अउ मंडपमातृका ये सप्त मातृका मन के बिहाव म अबढ़ महत्तम होथे। मायन के दिन काकी या भउजी ह उपास रिथे। गेंहू के आटा म दूध डार के रोटी (पकवान) बनाय जाथे। बनाये के बाद ओला झेंझरी म रख के मड़वा म टांग दे जाथे। साँझ-कुन वो रोटी ल धरके सुवासिन मन तरिया जाथे अउ उहां पूजा करथे। वापस आके वो रोटी ल घर म बांट के खाय जाथे।

 

आओ सुनथन आज के गीत…

ठाकुर देवता के पईयां परत हव वो
पईयां परत हव के दुलरू के होई हव सहाय
हो देवता दुलरू के होई हव सहाय
वो तो दुलरू के होई हव सहाय
हो देवता दुलरू के होई हव सहाय

संकर देवता के पईयां परत हव वो
पईयां परत हव के दुलरू के होई हव सहाय
हो देवता दुलरू के होई हव सहाय
वो तो दुलरू के होई हव सहाय
हो देवता दुलरू के होई हव सहाय


गायन शैली : ?
गीतकार : ?
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : अलका चंद्राकर
संस्‍था/लोककला मंच : ?
साभार : लखी सुंदरानी (सुंदरानी फिल्म्स – विडियो वर्ल्ड)

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

5 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. राहुल सिंह
    मई 27, 2011 @ 10:09:36

    मायन के बढि़या चित्र.

    प्रतिक्रिया

  2. Harihar Vaishnav
    मई 27, 2011 @ 13:13:16

    Mahatwapuurna prastuti ke liye aap, Alka Chandrakar jii aur Lakhi Sundrani jii kaa abhaar. Waakaii maayan kaa chitra bahut hii sundar hai. Is lok chitra ko dekh kar bhii kyaa Chhattisgarh mein lok chitron kii samriddha paramparaa ko nakaarnaa upyukta hogaa?

    प्रतिक्रिया

  3. toran lal sahu
    मई 28, 2011 @ 14:51:12

    kaya aap mujhea chhattisgarhi jas geet ka songs mujhea bej sakatea hai kaya mujhea net par nahi mil rahi ya to aap mujhea koi chhattisgarhi bhajans download karnea ka koi web do

    प्रतिक्रिया

  4. Prahlad joshi
    मई 29, 2011 @ 23:22:31

    Mujhe chhattishgarhi geet accha lagta hai.
    aap bhi apne cg. Ka naam roshan kare cg aur ishko sabhi jagah prachar -prashar kare .
    khoob download kare plz plz plz plz

    aapka dost

    प्रतिक्रिया

  5. Chhaliya Ram Sahani 'ANGRA'
    जनवरी 30, 2015 @ 13:24:57

    Bihaw harar sanskar he.Yema tel ,mayan au barat bidai , parghauni bhadauni sabo geet gaye jathe .mayan ke bahut sunder parmparik geet hare.

    प्रतिक्रिया

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