दे तो दे तो दाई … De to De to Dai

नहडोरी

बरात जाये के पहिली, वर ल नहलाये के समय ले कंकण (डोरी) बांधे के बेरा तक गाये जाने वाला गीत ल नहडोरी के गीत कहे जाथे। वर-वधू ल चढ़ाये तेल-हरदी ल धुलाये के नेंग ए नहडोरी ह। जेमा वर-वधू ल नहलाये जाथे ताकि बरात अउ भांवर ले पहिली वर-वधू ल सजाये-संवारे जा सके। नहडोरी के बेरा में घर म आये सबो सगा मन वर-वधू के सिर से सिर लगा के पानी झोंकथे। जेकर बाद वर-वधू ल नहलाये जाथे।

नहडोरी

नहलाये के बाद मौली धागा ल सात बेर सात सुवासिन के सिर ले घुमा के डोरी बनाये जाथे जेला वर के हाथ में आमा पान के संग सात गांठ बांधे जाथे, इही ल कंकण कहे जाथे। कंकण बांधे के बाद बरात निकासी के नेंग होथे।

कंकण

 

नहडोरी गीत के कुछ उदाहरण –

दाबे बर ले दे दाई खांडे तलवारे
घामे बर छतरी तनाय
कोन गांव ला टोरंव दाई
कोन गांव ला फोरंव
कोन गांव ले लानों बिहाय
रायपुर ला टोरंव
रायगढ़ ला फोरंव
नवागढ़ ले लानों बिहाय
चढ़त बेरा धरम के
उतरत बेरा लगिन के
धरम धरम जस ले ले
फेर धरम नइ मिले

नहडोरी के एक गीत ‘दे तो दाई अस्सी ओ रुपइया’ ये गीत ल अलग-अलग जगा म अलग-अलग गावत सुने ला मिल जाथे। ये गीत ह दाई अउ बेटा के बातचीत के रूप म हे जेमां बेटा ह दाई कर बिहाव बर रुपया मांगथे।

जैसे कि कुछ जगा म गाये जाथे …

दे तो दाई दे तो दाई अस्सी ओ रुपइया
सुन्दरी ला लातेंव मंय बिहाये ओ दाई
सुन्दरी-सुन्दरी बाबू तुम झन रटिहौ
गा सुन्दरी के देश बड़ा दूरै रे भइया
तोर बर लाहवं दाई रंधनी परोसनी
ओ मोर बर घर के सिंगार ओ दाई
गोड़े बर रुपमुचा पनही
छांव बर छतरी तनाय, हां-हां जी चले जाबो सुन्दरी बिहाव
लाये बर देबे इक तलवारी चढ़ेबर
लीली हंस घोरी, हां हां जी चले जाबो सुन्दरी बिहाय

अउ कुछ जगा म गाये जाथे …

दे तो दाई दे तो दाई अस्सी ओ रुपैया
सुन्दरी ला लातेंव बिहाय
सुन्दरी सुन्दरी रटन धरे बाबू
सुन्दरी के देस बड़ दूर
तोर बर लनिहों दाई रंधनि परोसनि
मोर बर घर के सिंगार
पांव बर ले दे दाई रुचमुच पनही
चढ़े बर दे दे लिलि हंसा घोड़ा
भूख बर जोर दे दाई भुखहा कलेवना
प्यास बर गंगा जल

 

आओ सुनथन आज के गीत…

दे-तो दे-तो दाई अस्सी वो रुपैया के
सुंदरी ला लातेंव वो बिहाय
कि अ-वो दाई सुंदरी ला लातेंव वो बिहाय

सुंदरी सुंदरी बाबू तुम झन रटिहव के
सुंदरी के देस बड़ा दूर
कि अ-ग बाबू सुंदरी के देस बड़ा दूर

मोर बर लाबे बेटा रंधनी परोसनी के
तोर बर घर के सिंगार
कि अ-ग बेटा तोर बर घर के सिंगार

तैं तो हाबस दाई बड़ा वो अबुधनिन के
मांगत हस दूध के तैं मोल
कि अ-वो दाई मांगत हस दूध के तैं मोल

तोर बर लानिहंव दाई पानी भरईया के
मोर बर घर के सिंगार
कि अ-वो दाई मोर बर घर के सिंगार

पांव बर लेते दाई बजनी वो पनही के
चढ़े बर लीली हंसा घोड़ा
कि अ-वो दाई चढ़े बर लिलि हंसा घोड़ा


गायन शैली : ?
गीतकार : ?
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : ममता चंद्राकर
संस्‍था/लोककला मंच : ?

ममता चंद्राकर
ममता चंद्राकर

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

9 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. राहुल सिंह
    मई 30, 2011 @ 10:53:46

    बढि़या चलत हे, चलात रहव.

    प्रतिक्रिया

  2. Harihar Vaishnav
    मई 30, 2011 @ 12:32:14

    Bahut sundar. Aabhaar. Chhattisgarhii sanskriti ko sahejane ke is bhagiirath prayaas mein aapkaa yogdaan awismarniiy banaa rahegaa.

    प्रतिक्रिया

  3. YUVRAJ
    मई 31, 2011 @ 08:38:27

    unable to evaluate ……………………just incredible song…….too nice……
    (lage raho)

    प्रतिक्रिया

  4. SANJAY VERMA
    जून 01, 2011 @ 14:33:11

    Jai Johar bhaiyya,
    Maja aage bhaiya , aap man ke mehanat pura pura site me ubhar ke dikkat he. moro cg Album realige hone wala he.

    प्रतिक्रिया

  5. BALRAM SONWANI-9907758042
    अक्टूबर 30, 2011 @ 00:51:56

    nice mamta ji

    प्रतिक्रिया

  6. SANUK LAL YADAV
    अक्टूबर 10, 2013 @ 19:45:45

    हमर संस्कृति के चिन्हारी बिहाव गीत सुनके ह्रदय जुडागे।
    कोरी-कोरी धन्यवाद।

    प्रतिक्रिया

  7. Chhaliya Ram Sahani 'ANGRA'
    जनवरी 30, 2015 @ 13:29:41

    Mahatari beta ke maya bad sunder geet nahadori.

    प्रतिक्रिया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

हमारी यह पेशकश आपको पसंद आई ?
अपना ईमेल आईडी डालकर इस ब्लॉग की
सदस्यता लें और हमारी हर संगीतमय भेंट
को अपने ईमेल में प्राप्त करें.

Join 610 other followers

हमसे जुड़ें ...
Twitter Google+ Youtube


.

क्रियेटिव कॉमन्स लाइसेंस


सर्वाधिकार सुरक्षित। इस ब्लॉग में प्रकाशित कृतियों का कॉपीराईट लोकगीत-गाथा/लेख से जुड़े गीतकार, संगीतकार, गायक-गायिका आदि उससे जुड़े सभी कलाकारों / लेखकों / अनुवादकों / छायाकारों का है। इस संकलन का कॉपीराईट छत्तीसगढी गीत संगी का है। जिसका अव्यावसायिक उपयोग करना हो तो कलाकारों/लेखकों/अनुवादकों के नाम के साथ ब्लॉग की लिंक का उल्लेख करना अनिवार्य है। इस ब्लॉग से जो भी सामग्री/लेख/गीत-गाथा/संगीत लिया जाये वह अपने मूल स्वरूप में ही रहना चाहिये, उनसे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ अथवा फ़ेरबदल नहीं किया जा सकेगा। बगैर अनुमति किसी भी सामग्री के व्यावसायिक उपयोग किये जाने पर कानूनी कार्रवाई एवं सार्वजनिक निंदा की जायेगी...

%d bloggers like this: