बर तरी खड़े हे बरतिया … Bar Tari Khare He Bartiya

बिदा

हंसी-खुसी ले भरे बिहाव म बिदा के बेरा ह पिरा ले भरे होथे। ये बेरा वधू पक्ष ह कन्या ल वर पक्ष ल सौंपथे अउ एकर संग बेटी ह बिरान हो जथे, पहुना बन जथे। दाई ददा के घर ले अपन घर जाथे वधू, बिदा देथे सब्बो मयारू। बचपन के संगी जहुंरिया, ददा के दुलार, दाई के कोरा, भाई के स्नेह अउ बहिनी के मया ले बने घर-अंगना ल छोड़के नोनी ह अब अपन नवा घर जाथे। सिसकत अउ भींजे आंखी ले अपन दुलौरिन ल बिदा करत घरवाले मन ल देखके बिरानमन के आंखी ह घलो छलक जथे। हाथ म धान भरके पाछू कोती उछालत बेटी ह मइके के साध करत चले जथे। पुरखा-मन के रचे दुनिया के इहि रित ए। बिदा हरे नवसृजन बर पुनर्जन्म।

ये बेरा गाये जाने वाला गीत म कन्या ओकर दाई, ददा, भाई अउ सब्बो मयारू-मन के पिरा भरे होथे। दाई ह दुख म इंहा तक की डारथे…

बेटी के संचरत जान पाइतेंव
अंडी के पान ला खा लेतेंव
कोखिया ला पार लेतेंव बांझ

बेटी ह घलो कतार हो जथे। वहू अनजान संग बने रिस्ता ले दुखी हे, जे ओला जीवन भर-बर ओकर घर ले बिलग करके लेगत हे। ओकर ले बिछड़त दाई ददा भाई बहिनी के पिरा नई देखे जाय…

रहेंव मैं दाई के कोरा ओ
अंचरा मा मुंह ला लुकाय ओ
ददा मोर कहिथे कुआं में धसि जइतेंव
बबा कथे लेतेंव बैराग, ओ बेटी
काहे बर ददा कुआं में धसि जाबे
काहे बर बबा लेबे बैराग
बालक सुअना पढ़न्ता मोर ददा
मोला झटकिन लाबे लेवाय

सब ला बेटी ले बिछुड़े के पिरा हे फेर दाई के पिरा सबले जादा होथे। आखिर वो का कर सकथे? ओकर कोख म पले बेटी ल सदा बर घर म तो नई रखे जा सके। बेटी ह पराया धन होथे। तेकर सेती दाई ह बेटी ल समझा-बुझा के आसिरवाद देथे…

मंगनी करेंव बेटी, जंचनी करेंव ओ
बर करेंव बेटी, बिहाव करेंव ओ
जा जा बेटी, कमाबे खाबे ओ
मार दिही बेटी, रिसाय जाबे ओ
मना लिही बेटी, त मान जाबे ओ
जांवर जोड़ी संगे, बुढ़ा जाबे ओ
सुख दुख के रद्दा, नहक जाबे ओ

बिदा के कुछ अउ गीत …

मैं परदेसिन आवं
पर मुलुक के रद्दा भुलागेंव
अउ परदेसिया के साथ
दाई कइथे रोज आबे बेटी
ददा कइथे आबे दिन चार
भईया कइथे तीजा पोरा
भउजी कइथे कोन काम
मैं परदेसिन आवं
पर मुलुक के रद्दा भुलागेंव
अउ परदेसिया के साथ

– o –

अतेक दिन बेटी तैं घर मोर रहे वो
आज बेटी भये रे बिरान
झिनबर डोला बिलमइते कहार भईया
मैं तो करी लेतेंव ददा संग भेंट
झिनबर डोला बिलमइते कहार भईया
मैं तो करी लेतेंव दाई संग भेंट

अतेक दिन बहिनी तैं घर मोर रहे वो
आज बहिनी भये रे बिरान
झिनबर डोला बिलमइते कहार भईया
मैं तो करी लेतेंव भाई संग भेंट
झिनबर डोला बिलमइते कहार भईया
मैं तो करी लेतेंव भउजी संग भेंट

– o –

दुलरी के अंगना में एक पेड़ पारस
नोनी चिड़ियन करथे बसेर
आवत चिरईया मोर रूमझुम लगथे
नोनी जावत चिरईया सिमसान
संगी जहुंरिया दुनो बइठे ल अइहव
घर बेटी बिना रे अंधियार

– o –

नीक नीक लुगरा निमार ले वो
आवो मोर दाई, बेटी पठोवत आंसू हारे वो
नोनी के छूटगे महतारी वो
आवो मोर दाई, बुता तो होगे तोर भारी वो
चार दिन दाई तैंहर खीझेस वो
आवो मोर दाई, मया गजब तैंह करस वो
नोनी के घर आज छूटगे वो
आवो मोर दाई, बाहिर म घर ल बनाही वो
नोनी के जोर तुम जोरितेव वो
आवो मोर दाई, रोवथे डण्ड पुकारे वो
पहुंना तो नोनी अब बनगे वो
आवो मोर दाई, बेटी के विदा तुम करिदेव वो

– o –

दाई के रेहेंव में रामदुलारी
दाई तोरे रोवय महल वो
अलिन गलिन दाई रोवय
ददा रोवय मुसरधार वो
बहिनी बिचारी लुकछिप रोवय
भाई के करय दण्ड पुकार वो
तुमन रइहव अपन महल मा
दुख ला देइहव भूलाय वो
अंसुवन तुम झन ढारिहव बहिनी
सबे के दुखे बिसार वो
दुनिया के ये हर रित हे नोनी
दिये हे पुरखा चलाय वो
दाई ददा के कोरा मा रेहेन
अचरा मा मुह ला लुकाय वो
अपन घर तुमन जावव बहिनी
झन करव सोंच बिचार वो

– o –

घर के दुवारी ले दाई रोवथे
आज नोनी होये बिराने ओ
घर के दुवारी ले ददा मोर रोवथे
रांध के देवइया बेटी जाथे
अपन कुरिया के दुवारी ले भईया मोर रोवथे
मन के बोधइया बहिनी जाथे
भीतरी के दुवारी भउजी मोर रोवथे
लिगरी लगइया नोनी जाथे
दाई मोर रोवथे नदिया बहथे
ददा रोवय छाती फाटथ हे
हाय हाय मोर दाई
भईया रोवय समझाथे
भउजी नयन कठोरे वो

बिदा के पिरा ल पंचराम मिर्झा के गाये गीत करले सिंगार, मोर गर के हार, जा तेहां ससुरार जाबे म महसूस कर सकथव।

वधू ल बिदा कराके वर अउ बराती अपन गांव लहुट जथे। बरात वापसी म डोला परछन के नेंग होथे। जब डोला घर के मुहाटी म रुकथे त दाई ह डोली के ऊपर सूपा रखके पांच मुट्ठी नमक रखथे। ऊपर से मसूर ल ए पार ले ओ पार करथे। ये ह एक टोटका हरे। तहान वधू ह धान ले भरे झेंझरी म पांव रखके उतरथे। सुवासिन मन दुल्हा-दुल्हिन ल अंगना म ले जाथे। उंहा चौक पूरे जगा म दुनों ल पीढ़ा म खड़ा करे जाथे अउ गांव-घर के महिला मन ओकर आरती उतारथे। तहान दुनों झन ल घर म लेगथे सुवासिन मन ओकर रद्दा छेंकथे। पगरैत ह ओला नेंग देथे तभे भीतर जावन देथे एला “डेहर छेकउनी” कहे जाथे। भीतर जाके वधू खाली कूरो में चांउर भरथे जेला वर ह लात मार के गिरा देथे। अइसन 7 बार करे जाथे । एकर बाद वर वधू के मउर निकाल दे जाथे।

दुल्हा-दुल्हन के संकोच ल दूर करे-बर कंकन-मउर के नेंग होथे। जेमा वधू के घर ले आये लोचन पानी ल परात / टठिया म रखके मड़वा के तीर म एक दूसर के कंकन छोड़वाय जाथे। तहान लोचन पानी म कौड़ी / सिक्का / मुंदरी / माला खेले जाथे। जेमा वर एक हाथ ले अउ वधू दुनों हाथ ले कौड़ी खोजथे। जे सिक्का पाथे वो जीत जथे। 7 बेर अइसे खेले जाथे। सिक्का डारे के काम सुवासिन मन करथे। एकर पाछू सबो-झन टिकावन टिकथे जेला धरमटीका कहे जाथे। एकर दू-तीन दिन बाद वधू के छोटे भाई, जीजा अउ दू-चार झन वधू ल लेगे बर आथे जेला चौथिया कहे जाथे। दुल्हा-दुल्हन जादा उमर के होथे त बिहाव अउ पठौनी एके संग कर दे जाथे, कम उमर म होथे त गौना होये के बाद “घर सौंपना” जेला सुहागरात कहे जाथे होथे। बने मुहूरत म मड़वा ल उखाड़े जाथे अउ ओला तरिया म ठंडा/विसरजित कर दे जाथे।

 

आज के बिदा गीत के संग बिहाव गीत के आखिरी गीत लेके आय हव। आओ सुनथन बिदा गीत…

बर तरी खड़े हे बरतिया
बर तरी खड़े हे बरतिया
कि लीम तरी खड़े हे कहार

बर तरी खड़े हे बरतिया
बर तरी खड़े हे बरतिया
कि लीम तरी खड़े हे कहार

अइसन सैंया निरदइया
अइसन सैंया निरदइया
कि चलो चलो कहिथे बरात

दाई मोर रोवत हे महल में
दाई मोर रोवत हे महल में
कि ददा मोर रोवय दरबार

झिनबर डोला बिलमइतेंव
झिनबर डोला बिलमइतेंव
कि दाई संग करी लेतेंव भेंट

बड़े बड़े डोलवा चंदन के
बड़े बड़े डोलवा चंदन के
कि छोटे छोटे लगे हे कहार

अइसन सैंया निरदइया
अइसन सैंया निरदइया
कि चलो चलो कहिथे बरात

लकठा में खेती झन करबे गा
लकठा में खेती झन करबे
कि दुरिहा में बेटी झन बिहाय

लकठा के खेती गरवा खाथे गा
लकठा के खेती गरवा खाथे
कि दुरिहा के बेटी दुख पाय

तैं परदेसनिन हो गे वो
तैं परदेसनिन हो गे
कि जा परदेसिया के साथ

दाई कथे आबे रोज बेटी
दाई कथे आबे रोज बेटी
कि ददा कथे आबे दिन चार

भाई कथे आबे तीजा पोरा में
भाई कथे आबे तीजा पोरा में
कि भउजी कथे आये के का काम

अइसन सैंया निरदइया
अइसन सैंया निरदइया
कि चलो चलो कहिथे बरात
कि चलो चलो कहिथे बरात
कि चलो चलो कहिथे बरात


गायन शैली : ?
गीतकार : ?
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : ममता चंद्राकर
संस्‍था/लोककला मंच : ?

ममता चंद्राकर
ममता चंद्राकर

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

28 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. Harihar Vaishnav
    जून 27, 2011 @ 11:52:55

    Sundar aur maarmik geet. Aabhaar.

    प्रतिक्रिया

  2. D.K. Parihar
    जून 27, 2011 @ 20:36:02

    Bahoot sughar marmik geet. bahut bahuut dhanyawad

    प्रतिक्रिया

  3. राहुल सिंह
    जून 27, 2011 @ 20:50:48

    भावपूर्ण, बढि़या संकलन-अभिलेखन.

    प्रतिक्रिया

  4. kuber singh dhruw
    जून 28, 2011 @ 08:50:45

    bahut achha geet have bas aisane naya naya geet sunawat rahav

    प्रतिक्रिया

  5. madhir
    जून 28, 2011 @ 16:47:30

    bahut sughar geet have

    प्रतिक्रिया

  6. madhir
    जून 28, 2011 @ 16:48:58

    bahut aacha aacha geet sakele hav

    प्रतिक्रिया

  7. sanjaay rathore
    जून 29, 2011 @ 13:18:34

    kya baat hai sir

    प्रतिक्रिया

  8. संजय मिश्रा 'हबीब'
    जून 30, 2011 @ 16:35:24

    बड सुग्घर गीत हवे… ओतकेच सुग्घर संगीत अउ गायन घलो….
    बधई…

    प्रतिक्रिया

  9. dharmendra kumar sahu
    जुलाई 01, 2011 @ 09:36:37

    antarman ma basge bad sugghar he, mor aau mor parivar ke taraf le bahut bahut badhai ho.

    प्रतिक्रिया

  10. DEVNATH YADAV
    जुलाई 03, 2011 @ 17:36:09

    Bahoot sughar geet lagis se ji sangwari. ye geet sunaye khatir bahut bahuut dhanyawad.

    प्रतिक्रिया

  11. govind
    जुलाई 05, 2011 @ 21:57:01

    bahuh badiya lagis sath ma ae maya daya banae rakhahu. saht ma chhattisgarhi flim ke gana la bhi rakho achha gana have

    प्रतिक्रिया

  12. Sahu Santosh
    अगस्त 06, 2011 @ 16:19:30

    mor shadi yaad aage a gaana la me ha pura chhattisgarh ma sunna chahathao dhanyavad rajesh ji……… ..

    प्रतिक्रिया

  13. SAHU MAHESHWAR
    अगस्त 09, 2011 @ 09:56:49

    VIHAV GEET BAHUT BADIHA HAVAI……………

    प्रतिक्रिया

  14. manglo Ram
    अगस्त 09, 2011 @ 18:30:57

    sabo sangi sngwari man la mor le jay johar aap man hum la ye seva de hu okar le hum khush han

    ****Ram RAm Jay Johar ****

    प्रतिक्रिया

  15. nagendra negi
    सितम्बर 19, 2011 @ 10:58:06

    adbad sundar hawea…aap man ke prayas ha….

    प्रतिक्रिया

  16. shishir deshmukh
    अक्टूबर 12, 2011 @ 16:08:17

    bhut sunder mati ki mahek ke sath apni sunderta liye hue

    प्रतिक्रिया

  17. kishor sahu
    फरवरी 10, 2012 @ 23:55:00

    mor sabbo sangwari mal jai johar mor best gayika mamta chandraker

    प्रतिक्रिया

  18. Mahavir
    फरवरी 11, 2012 @ 16:47:43

    badhiya sugghar gaana haway.

    dhanyavad.

    प्रतिक्रिया

  19. Balvant thakur
    जुलाई 04, 2012 @ 10:05:09

    The song was beautiful

    प्रतिक्रिया

  20. HORILAL SINHA
    नवम्बर 30, 2012 @ 08:21:59

    GEET HA BAHUT SUGGGHAR LAGIS BAHUT BAHUT DHANYAVAD

    प्रतिक्रिया

  21. sohan lal verma chakarbhata bilaspur cg
    दिसम्बर 12, 2012 @ 07:07:10

    geet ha man la bhuk kar dethe

    प्रतिक्रिया

  22. chandra
    मार्च 29, 2013 @ 16:03:33

    au junna git hohi tahu la ehi ma rakhat jana he tabto pura desh ma surta rakhihi sunaiyya man ha

    प्रतिक्रिया

  23. manohar das mersa
    जून 28, 2013 @ 20:01:06

    बड सुग्घर गीत हवे… ओतकेच सुग्घर संगीत अउ गायन घलो….
    बधई…
    dhanyavad
    hamar bunty bhai la abbad sughar lagis heway

    प्रतिक्रिया

  24. Sourya mahile
    फरवरी 15, 2014 @ 21:12:23

    Cg geet bahut achha lgthe sun k au maja ghala aathe

    प्रतिक्रिया

  25. champu raja
    दिसम्बर 04, 2014 @ 08:30:02

    bihawa geet sun k mahu la bigaw kaere k man karat he……

    प्रतिक्रिया

  26. Chhaliya Ram Sahani 'ANGRA'
    जनवरी 30, 2015 @ 13:44:41

    Bar tari chhaya hoy ke karan gaon me barat uhi ped ma rukthe.bidai ke geet kareja la chhalani kar dethe .dai dada ke kora sunna ho jathe au bin pani ke machhari barobar man chhatpatawat rahithe.

    प्रतिक्रिया

  27. Ghanashyam yadu
    अप्रैल 19, 2015 @ 13:01:09

    bad nik lagis he gurtur boli ha

    प्रतिक्रिया

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