धान ह कइसे संगी … Dhan Ha Kaise Sangi

धान ह कइसे संगी

धान ह कइसे संगी
धान ह कइसे संगी, माथ ल नवाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये

धान ह कइसे संगी
धान ह कइसे संगी, माथ ल नवाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये

हवा बजावत हाबय बंसरी~
बादर बजावत हाबय तबला
होय-रे-होय-होय
बादर बजावत हाबय तबला

थिरक थिरक पानी नाचे~
देख के मजा आवे हम-ला
होय-रे-होय-होय
देख के मजा आवे हम-ला

मेहनत ल करे हंसके
मेहनत ल करे हंसके
तभे तो फल पाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये

धान ह कइसे संगी आहे
धान ह कइसे संगी होय
धान ह कइसे संगी, माथ ल नवाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये

धिर~र~र~र~र~र~र
तता-तता-तता मोरे बईला
हाय-रे-हाय
हीरा मोती रे मोर छैला
हाय-रे-हाय
हीरा मोती रे मोर छैला

हरियागे खेत-खार परिया~
साजे सरार अउ तरिया
होय-रे-होय-होय
साजे सरार अउ तरिया

रेंगे देवरानी जेठानी
रेंगे देवरानी जेठानी
कनिहा ल मटकाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
हाय-रे-हाय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये

धान ह कइसे संगी
धान ह कइसे संगी, माथ ल नवाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये

मोरा खुरमी ला वोदे ओढ़े
पवन देव गावत हे कहरवा
होय-रे-होय-होय
पवन देव गावत हे कहरवा

पाना बिरझन के अइसे हाले~
जइसे नाचत हे मंजुरा
होय-रे-होय-होय
जइसे नाचत हे मंजुरा

केतकी केंवरा के आभा
केतकी केंवरा के आभा
सेज ल सजाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये

धान ह कइसे संगी होय
धान ह कइसे संगी आहे
धान ह कइसे संगी, माथ ल नवाये ग
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
हाय-रे-हाय-हाय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये
होय-रे-होय-होय
जइसे नवा दुलहिन ह लजाये


गायन शैली : ?
गीतकार : ?
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : कुलेश्वर ताम्रकार
संस्‍था/लोककला मंच : नवा बिहान

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

14 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. Harihar Vaishnav
    अक्टूबर 16, 2011 @ 18:11:24

    sugghar geet-sangeet. aabhaar.

    प्रतिक्रिया

  2. shivam dinkar
    अक्टूबर 17, 2011 @ 08:36:20

    hello harihar i am shivam dinkar in cg.songs.wordprees i am the first time came in this web site and i am from kharsia

    प्रतिक्रिया

  3. shivam dinkar
    अक्टूबर 17, 2011 @ 08:40:49

    i am shivam dinkar and i most like the chhattishgarhigeetsangi i am so happy

    प्रतिक्रिया

  4. shivam dinkar
    अक्टूबर 17, 2011 @ 09:06:08

    i want to say my all friends name are Avinash,rakesh62682,satpurush, ashish, ramdev,
    indramani,awillison,mamta,pragati,narendra,pyush,pratik,shobha,jaikiran,ritik,pritam
    ,and we are all reading in 9th class [i am 13 year old ] are support aanaa hazare for his think of about jan lokpal bill in india

    प्रतिक्रिया

  5. shivam dinkar
    अक्टूबर 17, 2011 @ 09:35:58

    chhattish garhi gana man mor nana la badhia lagthe auuu mahu la ee website ha bhadhia lagthe kabar ki ye ha mor har massege la home page ma dekhathe
    mola bahut badhia lagis he………………………..

    प्रतिक्रिया

  6. vitendra panigrahi
    अक्टूबर 21, 2011 @ 12:57:33

    छत्तीसगढ़ में लगभग ९० प्रतिशत धान का फसल ठीक है लेकिन जगदलपुर के १० किमी एरिया में
    फसल काफी कमजोर है क्यों की धान के निकलने के समय पानी का अभाव हो गया ……..
    छत्तीसगढ़ को ऐसे भी धान का कटोरा कहा जाता है ………धान का फसल ठीक होने के
    उपलक्ष में सभी किसानो को शुभ कामनाएं …साथ ही दीपावली की सभी दोस्तों, देशवासियों को भी
    शुभकामनाएं …….सर्वे भवन्तु सुखिनंह ,सर्वे सन्तु निरामयाँ, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु .माँ कश्चिद् दुःख भागभवेत ….. समय समय पर अच्छे अच्छे गीत सुनाने के लिए छत्तीसगढ़ी गीत संगी के सभी साथियों बंधुओं का बहुत बहुत
    धन्यवाद …..चूँकि अभी धान का फसल भी कटने को है और आपने धान से सम्बंधित गीत सुनाया इसलिए
    koti koti धन्याद

    प्रतिक्रिया

  7. vitendra panigrahi
    अक्टूबर 21, 2011 @ 13:11:26

    प्रतिक्रिया

  8. कल्याणसिँह पटेल
    नवम्बर 14, 2012 @ 21:40:11

    बहुत सुघ्घर गीत हे सँगी

    प्रतिक्रिया

  9. कल्याणसिँह पटेल
    नवम्बर 14, 2012 @ 21:45:19

    बहुत सुघ्घर गीत हे सँगी मेह शहीद नगर बिरगाँव मेँ रहिथँव मोला प्रकति से लगाव हे।

    प्रतिक्रिया

  10. कल्याणसिँह पटेल
    जून 06, 2013 @ 18:59:29

    छ ग के किसनहा मन ला ए गीत ह गदगद कर देथे। मोरो मन हा सुनेच्च के मन करथे। कल्याणसिँह पटेल शहीद नगर बीरगाँव

    प्रतिक्रिया

  11. SANUK LAL YADAV
    अक्टूबर 09, 2013 @ 06:20:05

    गीत ला सुन के मन मस्त होगे अउ प्रकृति के शस्य शालीनि स्वरुप साकार होगे।
    धन्यवाद।

    प्रतिक्रिया

  12. Harisingh Padoti
    दिसम्बर 15, 2013 @ 08:22:32

    राम राम मै हरीसिन्ग छ्त्त्तीसगदी लोक गीत बने लगथे आप मन के गीत भी बने लगीस

    प्रतिक्रिया

  13. Chhaliya Ram Sahani 'ANGRA'
    दिसम्बर 11, 2014 @ 14:04:51

    dhan ke tulna nawa dulhin le karna bahut achha alankar he .bad sughghar gayan au lekhan he .

    प्रतिक्रिया

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