पिंजरा के पंछी … Pinjara Ke Panchhi

पिंजरा के पंछी

मरना भला परदेस में~
अपनों~ सगा ना कोय
पग पंछी भोजन करय
तन भंडारा होय
तन भंडारा होय

पिंजरा के पंछी, दू दिन के हे मेला
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
जग जिनगी के खेला रे~ हो~ओ
जग जिनगी के खेला रे खेला रे खेला
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)

मति बहुराए बारा-बानी, मांगत खोजत पसिया पानी
मांगत खोजत पसिया पानी, मांगत खोजत पसिया पानी (कोरस)
मति बहुराए बारा-बानी, मांगत खोजत पसिया पानी
मांगत खोजत पसिया पानी, मांगत खोजत पसिया पानी (कोरस)
खोर म गिंजरय जती अउ ज्ञानी~ हो~ओ
खोर म गिंजरय जती अउ ज्ञानी, कोन गुरु कोन चेला~
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)

मन में लामे मोल बेचाथे, कोनों गंवाथे कोनों पाथें
कोनों गंवाथे कोनों पाथे, कोनों गंवाथे कोनों पाथे (कोरस)
मन में लामे मोल बेचाथे, कोनों गंवाथे कोनों पाथें
कोनों गंवाथे कोनों पाथे, कोनों गंवाथे कोनों पाथे (कोरस)
कोनों देखत देखत रही जाथे~ हो~ओ
कोनों देखत देखत रही जाथे, पर-के पिरित झमेला~
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)

मया ल मथनी म मिला ले, मथ-मथ के तैं मीठीक जगा ले
मथ-मथ के तैं मीठीक जगा ले, मथ-मथ के तैं मीठीक जगा ले
मया मथनी म मन ल मिला ले, मथ-मथ के तैं मीठी मिला ले
मथ-मथ के तैं मीठी मिला ले, मथ-मथ के तैं मीठी मिला ले (कोरस)
गिन्हा फेंक बने ला भितराले~ हो~ओ
गिन्हा फेंक बने भितराले, इंहा हे ठेलम ठेला~
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
जग जिनगी के खेला रे~ हो~ओ
जग जिनगी के खेला रे खेला रे खेला
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)
पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)


गायन शैली : ?
गीतकार : ?
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : कुलेश्वर ताम्रकार, साधना यादव
संस्‍था/लोककला मंच : नवा बिहान

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

16 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. राहुल सिंह
    नवम्बर 09, 2011 @ 08:05:14

    बढि़या गीत अउ संग म चित्र भी अच्‍छा हे.

    प्रतिक्रिया

  2. Harihar Vaishnav
    नवम्बर 09, 2011 @ 09:56:28

    Bane geet-sangeet. Aabhaar bhaaii.

    प्रतिक्रिया

  3. kewalkrishna
    नवम्बर 09, 2011 @ 10:41:40

    एक और हृदयस्पर्शी गीत। फिर कहूंगा, बहुत अच्छा काम कर रहे हैं आप। बधाई।

    प्रतिक्रिया

  4. pyarelal
    नवम्बर 09, 2011 @ 13:28:23

    अती सुंदर मनभावन गीत लीखत हो जी

    प्रतिक्रिया

  5. sandeep kumar paikra
    नवम्बर 09, 2011 @ 14:37:15

    Karnpriye, Drowing is also Very Fine

    प्रतिक्रिया

  6. Heeradhar Sinha
    नवम्बर 10, 2011 @ 09:08:12

    aap manke geet sangrah bahut sundar he. aap badhai ke patra hain.

    प्रतिक्रिया

  7. Shankarlal.Prajapati
    नवम्बर 11, 2011 @ 00:16:26

    Love

    प्रतिक्रिया

  8. taje
    नवम्बर 15, 2011 @ 20:43:39

    eha download kaise hohi mor mobile ya computer ma!

    प्रतिक्रिया

  9. BHISHAM VERMA
    नवम्बर 16, 2011 @ 21:01:07

    bahoot badhiya

    प्रतिक्रिया

  10. धन्नू chhatttisgariya
    नवम्बर 18, 2011 @ 22:47:21

    badiya gana au chitra ha ghalo ek number he

    प्रतिक्रिया

  11. BALRAM SONWANI-9907758042
    नवम्बर 19, 2011 @ 12:58:13

    पिंजरा के रे पंछी, दू दिन के हे मेला (कोरस)

    प्रतिक्रिया

  12. kanta jain
    नवम्बर 23, 2011 @ 20:20:48

    GEET LA SUN KE TUMHAR GAYE GEET – JA RE BIDESHWA JA RE JA JA RE JA- YAAD AA GISE

    प्रतिक्रिया

  13. kanta jain
    नवम्बर 24, 2011 @ 22:53:12

    bahu badiya lay au taal he au Kuleshwar ji ke aavaj chhattisgarhi geet bar bane he aise lagthe

    प्रतिक्रिया

  14. D.S.DIWAN
    अक्टूबर 11, 2012 @ 15:37:58

    aap apne wevsait me aur purane gito ko samil kare.

    प्रतिक्रिया

  15. NAND YADAW
    फरवरी 23, 2013 @ 14:10:51

    bahut gurtur lagish he geet

    प्रतिक्रिया

  16. Chhaliya Ram Sahani 'ANGRA'
    दिसम्बर 06, 2014 @ 14:47:06

    jiyat janam le le hans le khel le pher durlabh ye sansar.

    प्रतिक्रिया

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