मन डोलय रे मांघ फगुनवा … Man Dole Re Mangh Fagunwa

होली के आते ही धरती प्राणवान हो उठती है, प्रकृति खिल उठती है और कवियों का भावुक नाजुक मन न जाने कितने रंग बिखेर देता है अपनी गीतों में। गाँवों में बसा हमारा भारत ग्राम्य संस्कृति में घुले मिले रचे बसे लोग मांगलिक प्रसंगों पर लोकगीत गाकर वातावरण को लुभावना बना देते हैं। यहाँ के लोग धरती के गीत गाते हैं और उन्हीं में हमारे पर्व और त्योहारों की झाँकी होती है। – प्रो. अश्विनी केशरवानी

कोन लंग गोरी लुकाये रे सुन्ना हे पारा
गोरी के ददा ससुर लागे भईया मोर सारा
गोरी के आंखी गोटारन के बांटी
गोरी के आंखी गोटारन के बांटी
गोरी के कनिहा सनड़ेवा के काड़ी
गोरी के कनिहा सनड़ेवा के काड़ी
गोरी ल देखे बिना जीव ले
गोरी ल देखे बिना जीव ले टूटत हे आसा
कोन लंगोरी लुकाये रे सुन्ना हे पारा
गोरी के ददा ससुर लागे भईया मोर सारा

बईहा सहीं आंय बांय बकत हो काबर
ये तो होली के तिहर गा
ये तो फागुन ए मया के तिहार ए
रंग गुलाल उड़ाओ गा
रंग गुलाल उड़ाओ अर पगला
रंग गुलाल उड़ाओ गा

अरे हां रे यारो आगे फागुन रंग भरके
अरे आगे फागुन रंग भरके
यारो आगे फागुन रंग भरके
अब जवानी के उड़त थे गुलाल होरे
अब जवानी के उड़त थे गुलाल
यारो आगे फागुन रंग भरके
होली हे~

मन डोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
हो मन डोलय रे मांघ फगुनवा
राजा बरोबर लगे मौर आमा
राजा बरोबर लगे मौर आमा
रानी सही परसा फुलवा
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
हो मन डोलय रे मांघ फगुनवा

पीपर उलहोवय अऊ डूमर गुलोवय
गरती तेन्दू चार मौउहा लुभोवय
पीपर उलहोवय अऊ डूमर गुलोवय
गरती तेन्दू चार मौउहा लुभोवय
मेला मड़ाई गंजागे झमाझम
मेला मड़ाई गंजागे झमाझम
चलय रे टुरी अउ घुलवा
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
हो मन डोलय रे मांघ फगुनवा

पुरवईया आवय गरोड़ा उड़ोवे
छांव आंवय जांवय लजावय मुंह खोलय
पुरवईया आवय गरोड़ा उड़ोवे
छांव आंवय जांवय लजावय मुंह खोलय
गांव गूंजे गमके अमरईया
गांव गूंजे गमके अमरईया
कुके रे कारी कोयलिया
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
हो मन डोलय रे मांघ फगुनवा

बिहाव पठोनी के लगिन धरागे
संगी जहुंरिया मया मा बंधागे
बिहाव पठोनी के लगिन धरागे
संगी जहुंरिया मया मा बंधागे
गावत बखानत चलेगा सियानिन
गावत बखानत चलेगा सियानिन
गांजा गूंजी संग बरतिहा
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
हो मन डोलय रे मांघ फगुनवा

फागुन के रंग झरय पिचकारी
लाली गुलाली होगे संगवारी
फागुन के रंग झरय पिचकारी
लाली गुलाली होगे संगवारी
चौंरा चौंरा मा धरके नंगाड़ा
चौंरा चौंरा मा धरके नंगाड़ा
खारेखार म ददरिया
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
हो रस घोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
हो मन डोलय रे मांघ फगुनवा
राजा बरोबर लगे मौर आमा
राजा बरोबर लगे मौर आमा
रानी सही परसा फुलवा
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
हो रस घोलय रे मांघ फगुनवा
रस घोलय रे मांघ फगुनवा
हो मन डोलय रे मांघ फगुनवा
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
हो रस घोलय रे मांघ फगुनवा
मन डोलय रे मांघ फगुनवा
हो रस घोलय रे मांघ फगुनवा
होली है~


गायन शैली : ?
गीतकार : लक्ष्मण मस्तुरिया
रचना के वर्ष : 1982
संगीतकार : खुमान गिरजा
गायन : लक्ष्मण मस्तुरिया, भईया लाल हेड़ाऊ, अनुराग ठाकुर, कविता वासनिक
संस्‍था/लोककला मंच : ?

 

लक्ष्मण मस्तुरिया भैय्यालाल हेड़ाऊ कविता वासनिक
लक्ष्मण मस्तुरिया     भैय्यालाल हेड़ाऊ    कविता वासनिक

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

गीत सुन के कईसे लागिस बताये बर झन भुलाहु संगी हो …

Advertisements

Previous Older Entries

हमारी यह पेशकश आपको पसंद आई ?
अपना ईमेल आईडी डालकर इस ब्लॉग की
सदस्यता लें और हमारी हर संगीतमय भेंट
को अपने ईमेल में प्राप्त करें.

Join 695 other followers

हमसे जुड़ें ...
Twitter Google+ Youtube


.

क्रियेटिव कॉमन्स लाइसेंस


सर्वाधिकार सुरक्षित। इस ब्लॉग में प्रकाशित कृतियों का कॉपीराईट लोकगीत-गाथा/लेख से जुड़े गीतकार, संगीतकार, गायक-गायिका आदि उससे जुड़े सभी कलाकारों / लेखकों / अनुवादकों / छायाकारों का है। इस संकलन का कॉपीराईट छत्तीसगढी गीत संगी का है। जिसका अव्यावसायिक उपयोग करना हो तो कलाकारों/लेखकों/अनुवादकों के नाम के साथ ब्लॉग की लिंक का उल्लेख करना अनिवार्य है। इस ब्लॉग से जो भी सामग्री/लेख/गीत-गाथा/संगीत लिया जाये वह अपने मूल स्वरूप में ही रहना चाहिये, उनसे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ अथवा फ़ेरबदल नहीं किया जा सकेगा। बगैर अनुमति किसी भी सामग्री के व्यावसायिक उपयोग किये जाने पर कानूनी कार्रवाई एवं सार्वजनिक निंदा की जायेगी...

संगी मन के गोठ …

shankar pandey पर झुपत झुपत आबे दाई … Jhup…
विजयालक्ष्मी भोंसले पर मोर झूलतरी गेंदा … Mor J…
विजयालक्ष्मी भोंसले पर मोर झूलतरी गेंदा … Mor J…
विवेक टण्डन पर मोर संग चलव रे … Mor San…
विवेक टण्डन पर तरि नारी नाहना … Tari Na…
अजय कुमार साहू पर झन मारो गुलेल … Jhan Mar…
लोमश पटेल पर अरपा पैरी के धार … Arpa…
Prashant पर मोर झूलतरी गेंदा … Mor J…
Mahendra kumar पर अरपा पैरी के धार … Arpa…
Chetan पर लागे रइथे दिवाना … Lage…