हमरो पुछइया भईया … Hamaro Puchhaiya Bhaiya

केदार यादव

मूलतः इस गीत को केदार यादव जी ने गाया था, केदार यादव जी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित संध्या में कविता वासनिक जी ने इस गीत को गाया था

केदार यादव

हमरो पुछइया भईया~ कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो देखइया भईया, कोनों नई-ए गा

हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
हमरो देखइया भईया, कोनों नई-ए गा
गोरी नई-ए, कारी नई-ए
टुरिल हे, मोटियारी नई-ए
जिनगी के संगवारी नई-ए
सुघर कस सुवारी नई-ए
गोरी नई-ए, कारी नई-ए
टुरिल हे, मोटियारी नई-ए
जिनगी के संगवारी नई-ए
सुघर कस सुवारी नई-ए

रांध के देवइया भईया~ कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
रांध के देवइया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा

असकटा डारिसे निचट, होटल के खवाई
होटल के खवाई
असकटा डारिसे निचट, होटल के खवाई
होटल के खवाई
मन बिमरहा खोजत हाबय, घर बइठे दवाई
घर बइठे दवाई
मन बिमरहा खोजत हाबय, घर बइठे दवाई
घर बइठे दवाई
पारा-भर ल गड़त हे मोर, आधा रात अवाई
आधा रात अवाई
पारा-भर ल गड़त हे मोर, आधा रात अवाई
आधा रात अवाई
चुगरी नई-ए, चारी नई-ए
गिल्ला नई-ए, गारी नई-ए
बाबु के किलकारी नई-ए
नोनी के महतारी नई-ए
चुगरी नई-ए, चारी नई-ए
गिल्ला नई-ए, गारी नई-ए
बाबु के किलकारी नई-ए
नोनी के महतारी नई-ए

रात-दिन लड़ईया भईया~ कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
रात-दिन लड़ईया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा

ओढ़र करके कूद-कूद के, ससुर के घर जातेन
ससुर के घर जातेन
ओढ़र करके कूद-कूद के, ससुर के घर जातेन
ससुर के घर जातेन
रंग-रंग के आनी-बानी के, तीन तेल के खातेन
तीन तेल के खातेन
रंग-रंग के आनी-बानी के, तीन तेल के खातेन
तीन तेल के खातेन
तेकरो ऊपर घेरी-बेरी, थोथना ल ओरमातेन
थोथना ल ओरमातेन
तेकरो ऊपर घेरी-बेरी, थोथना ल ओरमातेन
थोथना ल ओरमातेन
गांव म तो पुछारी नई-ए
हीरा के चिन्हारी नई-ए
भांवर के पिंयारी नई-ए
सारा नई-ए सारी नई-ए
गांव म तो पुछारी नई-ए
हीरा के चिन्हारी नई-ए
भांवर के पिंयारी नई-ए
सारा नई-ए सारी नई-ए

(ऐ~ भांटो~)
भांटो कउहइया भईया~ कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
भांटो कउहइया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा

देवता तुंहर पईयां लागंव, सुन लो हमर विनती
सुन लो हमर विनती
देवता तुंहर पईयां लागंव, सुन लो हमर विनती
सुन लो हमर विनती
किरिया हे नई सिखन आघु, दू ले तीन के गिनती
दू ले तीन के गिनती
किरिया हे नई सिखन आघु, दू ले तीन के गिनती
दू ले तीन के गिनती
जानत हबन पुरखा मन कस, नई चले उछ्न्ती
नई चले उछ्न्ती
जानत हबन पुरखा मन कस, नई चले उछ्न्ती
नई चले उछ्न्ती
घर नई-ए, दुवारी नई-ए
कोला नई-ए, बारी नई-ए
बारी म तरकारी नई-ए
ये जिनगी निस्तारी नई-ए
घर नई-ए, दुवारी नई-ए
कोला नई-ए, बारी नई-ए
बारी म तरकारी नई-ए
ये जिनगी निस्तारी नई-ए

हाथ-गोड़ मिंजईया भईया~ कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
हाथ-गोड़ मिंजईया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा

रांध के देवइया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
रात-दिन लड़ईया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
भांटो कउहइया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा
हमरो पुछइया भईया, कोनों नई-ए गा~आ~
हमरो देखइया भईया, कोनों नई-ए गा


गायन शैली : ?
गीतकार : रामेश्‍वर वैष्‍णव
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : ?
गायन : कविता वासनिक
संस्‍था/लोककला मंच : ?

कविता वासनिक
कविता वासनिक

 

यहाँ से आप MP3 डाउनलोड कर सकते हैं

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