चलो भईया रे … Chalo Bhaiya Re

चलो भईया रे

पूरब दिसा ले नवा सुरुज के, बगरत हे उजियारी
आसा अउ बिसवास जगाबो, भागे सबो अंधियारी

हो~~~

चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो

हूं~ हूं~ हूं~ हूं~ हूं~ हूं~

चलो भईया खांध म खांध मिलाके रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के

चलो भईया खांध म खांध मिलाके रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के

आपस के छोड़ भेदभाव ल, मया के बांध बंधाबो~ हे~
आपस के छोड़ भेदभाव ल, मया के बांध बंधाबो~ हे~
आलस छोड़, मेहनत के डोंगा मा
आलस छोड़, मेहनत के डोंगा मा
जुर-मिल डुबकी लगाबो रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के
चलो भईया खांध म खांध मिलाके रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के

गिर गिर उठना, आघु बढ़ना हमर ठठा हांसी
हमर ठठा हांसी
गिर गिर उठना, आघु बढ़ना हमर ठठा हांसी
हमर ठठा हांसी
जोर जुलुम ले का घबराबो, जोर जुलुम ले का घबराबो
हम पक्का भारतवासी रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के
चलो भईया खांध म खांध मिलाके रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के

हमर सन्सू में ताला भला कोन तोड़े कहाँ कब पाही~ हे~
हमर सन्सू में ताला भला कोन तोड़े कहाँ कब पाही~ हे~
खांध म खांध मिलाके रहिबो, खांध म खांध मिलाके रहिबो
हम मजदूर सिपाही रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के
चलो भईया खांध म खांध मिलाके रे, जिनगी ल जगाबो
बिगड़ी ल बनाबो, जांगर तोड़ कमा के

चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~
चलो जिनगी ल जगाबो, चलो बिगड़ी ल बनाबो
चलो भईया रे~


गायन शैली : ?
गीतकार : लक्ष्मण मस्तुरिया
रचना के वर्ष : ?
संगीतकार : खुमान साव
गायन : कुलेश्वर ताम्रकार अउ साथी
संस्‍था/लोककला मंच : ?

 

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